25 अगस्त से सफाई व्यवस्था, डोर-टू-डोर कचरा वाहन और पार्कों की देखरेख बंद करने की चेतावनी; 12 सूत्रीय मांगों को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ को सौंपा ज्ञापन
खबर:शिवपुरी शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। शिवपुरी नगर पालिका में कार्यरत सफाई कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान कर दिया है। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन (रजि.), जिला शिवपुरी ने सोमवार, 24 अगस्त को नगर पालिका अध्यक्ष एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपकर मांगों के निराकरण की मांग की है।
यूनियन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो 25 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। यूनियन के अनुसार हड़ताल के दौरान शहर में सफाई कार्य, डोर-टू-डोर कचरा वाहन संचालन और पार्कों की देखरेख जैसे महत्वपूर्ण कार्य बंद रहेंगे। ऐसे में यदि हड़ताल शुरू होती है तो शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
18 अगस्त को भी दिया था ज्ञापन
सफाई कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर इससे पहले भी प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। यूनियन के अनुसार 18 अगस्त 2026 को भी नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन कर्मचारियों की मांगों पर न तो पर्याप्त चर्चा हुई और न ही उन्हें वार्ता के लिए बुलाया गया।
संगठन का आरोप है कि वर्ष 2024, 2025 और 2026 में कर्मचारियों की मांगों को लेकर कई बार लिखित समझौते और आश्वासन दिए गए, लेकिन आज तक उन पर अपेक्षित रूप से अमल नहीं किया गया। इससे सफाई कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन का कहना है कि सफाई कर्मचारी शहर की स्वच्छता व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी समस्याओं का समय पर निराकरण किया जाना चाहिए।
सफाई कर्मचारियों की मांगों में सेवा से संबंधित समस्याओं के साथ वेतन, पीएफ, एनपीएस, बीमा, वर्दी, स्वास्थ्य सुविधाएं, नियमितीकरण और पदोन्नति जैसे मुद्दे शामिल हैं।
नियमितीकरण की प्रमुख मांग
सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को शासन के नियमों एवं आदेशों के अनुसार नियमित किया जाना शामिल है। संगठन विशेष रूप से ऐसे कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग कर रहा है, जिन्होंने लंबे समय से सेवा पूरी की है और करीब 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद यदि उन्हें स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिलता है तो उनके सामने भविष्य की सुरक्षा को लेकर समस्या बनी रहती है।
पदोन्नति की भी मांग
यूनियन ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उनकी योग्यता और सेवा के आधार पर पदोन्नति दिए जाने की मांग भी रखी है। संगठन की मांग है कि पात्र कर्मचारियों को स्वास्थ्य निरीक्षक, सफाई दरोगा, ड्राइवर और लिपिक जैसे पदों पर नियमानुसार पदोन्नति का अवसर दिया जाए तथा इसके लिए पीआईसी से प्रस्ताव पारित कराया जाए।
वेतन, पीएफ और एनपीएस का मुद्दा
सफाई कर्मचारियों ने वेतन से संबंधित समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया है। यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन से काटी जा रही एनपीएस और पीएफ की राशि समय पर उनके खातों में जमा की जानी चाहिए।
इसके साथ ही कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि वेतन में देरी होने से कर्मचारियों की बैंक ऋण की किश्तें प्रभावित होती हैं और कई बार किश्तें बाउंस होने की स्थिति बन जाती है।
त्योहार एडवांस और कर्मचारियों की सुविधाएं
सफाई कर्मचारियों ने रक्षाबंधन से पहले त्योहार/ग्रेन एडवांस की मांग भी रखी है। यूनियन के अनुसार स्थायी कर्मचारियों को 10 हजार रुपए तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 5 हजार रुपए एडवांस दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा कर्मचारियों को वर्दी और बरसाती उपलब्ध कराने तथा विभाग की ओर से दुर्घटना बीमा कराने की मांग भी की गई है। बारिश के मौसम में सफाई कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है।
मृत्यु की स्थिति में मुआवजा और अनुकंपा नियुक्ति
यूनियन ने मस्टर कर्मचारियों की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि देने तथा परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की मांग रखी है।
संगठन का कहना है कि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में परिवार को आर्थिक सहायता और रोजगार का प्रावधान जरूरी है।
ईएसआईसी कार्ड और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग
सभी कर्मचारियों को ईएसआईसी कार्ड उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है, ताकि उन्हें चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सके। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कराने की मांग की गई है।
संगठन ने शारीरिक रूप से काम करने में अक्षम हो चुके कर्मचारियों के स्थान पर उनके परिवार के सदस्य को रोजगार देने की मांग भी उठाई है।
ड्राइवरों का नियमितीकरण और ऑनलाइन हाजिरी का विरोध
यूनियन ने नगर पालिका के वाहन चालकों को उनके पद पर नियमित करने और समान मानदेय दिए जाने की मांग की है। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए लागू ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था को समाप्त कर पुराने तरीके से रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराने की मांग भी की गई है।
हड़ताल हुई तो शहर की सफाई पर पड़ेगा असर
यदि प्रशासन और सफाई कर्मचारी संगठन के बीच सहमति नहीं बनती है और 25 अगस्त से हड़ताल शुरू होती है, तो इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण बंद होने से घरों और बाजारों में कचरा जमा होने की स्थिति बन सकती है। वहीं सार्वजनिक स्थलों, सड़कों और नालियों की सफाई भी प्रभावित होने की आशंका है।
फिलहाल गेंद नगर पालिका प्रशासन के पाले में है। सफाई कर्मचारियों की मांगों पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है और क्या वार्ता के जरिए हड़ताल टलती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द समाधान नहीं निकलता है तो शहर को सफाई व्यवस्था से जुड़े गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।