बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी शहर में करीब आधे घंटे तक हुई तेज बारिश ने लोगों को उमस और भीषण गर्मी से राहत दिलाई। कई दिनों से गर्मी और चिपचिपाहट से परेशान लोग बारिश होने के बाद राहत महसूस करते नजर आए। बारिश के दौरान शहर की कई सड़कें पानी से लबालब हो गईं, जबकि निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई।
बच्चों ने बारिश का आनंद लिया और बाजारों में भी कुछ समय के लिए चहल-पहल कम हो गई। हालांकि यह बारिश लोगों को राहत देने वाली जरूर रही, लेकिन जिले में अब तक मानसून की रफ्तार कमजोर बनी हुई है। यही कारण है कि इस वर्ष बारिश का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में काफी पीछे चल रहा है।
भू-अभिलेख विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 5 अगस्त 2026 तक शिवपुरी जिले में औसतन 292.36 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक जिले में 1040.48 मिलीमीटर औसत बारिश हो चुकी थी। यानी इस बार अब तक करीब 748 मिलीमीटर कम वर्षा रिकॉर्ड हुई है। जिले की सामान्य औसत वार्षिक वर्षा 816.3 मिलीमीटर मानी जाती है, जबकि वर्ष 2025 के पूरे मानसून सीजन में जिले में 1585.86 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इससे साफ है कि इस बार मानसून अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है।
कम बारिश का असर जिले के सबसे बड़े जलाशय अटल सागर (मड़ीखेड़ा) बांध पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सिंध परियोजना की 5 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार बांध में वर्तमान में 488.63 मिलियन घनमीटर पानी संग्रहित है, जो इसकी कुल भंडारण क्षमता 834.83 मिलियन घनमीटर का केवल 58.53 प्रतिशत है। बांध का जलस्तर 339.70 मीटर दर्ज किया गया है। जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जल संग्रहण पर इसका असर पड़ सकता है।
यदि पिछले वर्ष की स्थिति से तुलना की जाए तो अंतर और भी स्पष्ट दिखाई देता है। 4 अगस्त 2025 को मड़ीखेड़ा बांध में 622.69 मिलियन घनमीटर पानी संग्रहित था, जो इसकी कुल क्षमता का 74.59 प्रतिशत था। उस समय लगातार हो रही बारिश के कारण सिंध नदी में पानी की अच्छी आवक बनी हुई थी और अगस्त के पहले सप्ताह में ही बांध तेजी से भरने लगा था। बाद में जलस्तर बढ़ने पर अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए बांध के गेट भी खोलने पड़े थे।
इस वर्ष मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। कई क्षेत्रों में खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही है और फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। जलाशयों और तालाबों में भी अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंच पाया है। हालांकि बुधवार की बारिश से शहरवासियों को गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन जिले की जल स्थिति को सामान्य बनाने और मड़ीखेड़ा बांध को भरने के लिए आने वाले दिनों में अच्छी एवं लगातार बारिश की आवश्यकता बनी हुई है। मौसम विभाग और किसान दोनों की निगाहें अब आगामी बारिश पर टिकी हुई हैं।