खुशबू शर्मा:खबर शिवपुरी शहर में मानसून के साथ लगातार हो रही बारिश के बाद शिवपुरी में अब मच्छरों से होने वाली बीमारियों डेंगू और मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के लिए प्रजनन का कारण बन सकता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार लार्वा सर्वे, लार्वा विनिष्टीकरण और फॉगिंग अभियान चलाया जा रहा है।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा के
निर्देशानुसार तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषिश्वर के मार्गदर्शन में मलेरिया विभाग और नगरपालिका की संयुक्त टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर घरों और आसपास के स्थानों की जांच कर रही हैं। अभियान का उद्देश्य मच्छरों के पनपने से पहले ही उनके लार्वा को नष्ट करना और डेंगू-मलेरिया के संभावित संक्रमण को रोकना है।
206 घरों में पहुंची टीम, 65 घरों में मिला लार्वा
मलेरिया विभाग की टीम ने गत दिवस सईसपुरा और हम्माल मोहल्ले में सघन लार्वा सर्वे अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने कुल 206 घरों की जांच की।
हम्माल मोहल्ले में 100 घरों का सर्वे किया गया। इनमें से 33 घरों में मच्छर का लार्वा पाया गया। इसी तरह सईसपुरा में 106 घरों की जांच के दौरान 32 घरों में लार्वा मिला।
कुल मिलाकर 206 घरों में से 65 घरों में मच्छर का लार्वा मिला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर ही लार्वा का विनिष्टीकरण किया। साथ ही लोगों को घरों में पानी जमा नहीं होने देने और नियमित रूप से पानी के पात्रों की सफाई करने की समझाइश दी गई।
101 संदिग्धों की मलेरिया जांच, सभी रिपोर्ट निगेटिव
लार्वा सर्वे के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मलेरिया की संभावित स्थिति की भी जांच की। दोनों क्षेत्रों में आरडीटी किट के माध्यम से 101 संदिग्ध लोगों की मलेरिया जांच की गई।
राहत की बात यह रही कि जांच में सभी रिपोर्ट नेगेटिव आईं। टीम को किसी भी व्यक्ति में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए किसी एक दिन की निगेटिव रिपोर्ट के आधार पर लापरवाही नहीं बरती जा सकती। लगातार सर्वे और रोकथाम की कार्रवाई जरूरी है
घर में जमा छोटा सा पानी भी बन सकता है खतरा
स्वास्थ्य विभाग की चिंता सिर्फ बड़े जलभराव को लेकर नहीं है। घरों के आसपास पड़े कूलर, गमले, पुराने बर्तन, टायर, खुले टैंक और अन्य पानी के पात्र भी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकते हैं।
कई बार लोग बड़े जलभराव को ही खतरा मानते हैं, लेकिन थोड़ी मात्रा में लंबे समय तक जमा साफ पानी भी मच्छरों के लिए अनुकूल जगह बन सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग लोगों से अपने घर और आसपास के क्षेत्र में नियमित रूप से निरीक्षण करने की अपील कर रहा है।
डेंगू-मलेरिया के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषिश्वर ने नागरिकों से अपील की है कि बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
तेज बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों एवं मांसपेशियों में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह मिलने से बीमारी की स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
कूलर का पानी हर सप्ताह बदलें
डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए सबसे जरूरी कदम मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करना है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से कहा है कि कूलर का पानी हर सप्ताह खाली कर उसे सुखाएं। गमलों, टूटे बर्तनों, टायरों और खुले टैंकों में पानी जमा न होने दें।
सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करने, घर से बाहर निकलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनने और आवश्यकता के अनुसार मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी गई है।
इसके अलावा सुबह और शाम के समय खिड़की-दरवाजों को सुरक्षित रखने तथा जालीदार दरवाजों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
रुके पानी पर विशेष नजर
स्वास्थ्य विभाग ने नालियों, गड्ढों और लंबे समय से रुके पानी वाले स्थानों पर विशेष ध्यान देने को कहा है। ऐसे स्थानों पर स्थानीय परिस्थितियों और प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार मच्छर नियंत्रण के उपाय किए जाने चाहिए।
नगरपालिका और मलेरिया विभाग की टीमें लगातार ऐसे स्थानों को चिन्हित कर लार्वा विनिष्टीकरण और फॉगिंग जैसी कार्रवाई कर रही हैं।
सरकारी अस्पतालों में जांच और इलाज निशुल्क
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि डेंगू या मलेरिया के लक्षण दिखाई देने पर घबराएं नहीं। शासकीय अस्पतालों में जांच और उपचार की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।
विभाग ने खास तौर पर लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के मेडिकल स्टोर से दर्द निवारक दवाएं लेने से बचने की सलाह दी है। डेंगू की आशंका में कुछ पेनकिलर दवाएं नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसलिए दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेने की बात कही गई है।
बारिश के बाद अब मच्छरों पर वार
शिवपुरी में बारिश के बाद जलभराव और नमी का दौर जारी है। ऐसे में डेंगू-मलेरिया की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर घर की भागीदारी जरूरी है। सईसपुरा और हम्माल मोहल्ले में 206 घरों के सर्वे में 65 घरों में लार्वा मिलना लोगों के लिए भी चेतावनी है।
लार्वा मिला तो टीम ने नष्ट किया, 101 की जांच हुई तो सभी निगेटिव निकले—लेकिन खतरा टला नहीं है। स्वास्थ्य विभाग का अभियान लगातार जारी है और अब सबसे बड़ा हथियार लोगों की जागरूकता और घरों के आसपास पानी जमा न होने देना ही है।