खबर:शिवपुरी जिले में लगातार हो रही बारिश अब जल संरचनाओं पर साफ असर दिखाने लगी है। नदी, नाले और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने के साथ ही प्रशासन और जल संसाधन विभाग की निगरानी भी बढ़ गई है। मंगलवार सुबह मोहिनी पिकअप वियर का पहला गेट खोलकर सिंध नदी में पानी छोड़ने की शुरुआत कर दी गई। वियर के 13 गेटों में से फिलहाल एक गेट खोला गया है, जिससे करीब 52.64 क्यूमेक पानी सिंध नदी में छोड़ा जा रहा है।
मोहिनी वियर का गेट खुलते ही सिंध नदी के बहाव में और तेजी आने की संभावना है। इसे देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी के आसपास जाने और किसी भी तरह की जोखिम भरी गतिविधि से बचने की अपील की है।
सुबह 6 बजे खोला गया पहला गेट
जानकारी के अनुसार मोहिनी पिकअप वियर के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार बारिश होने के कारण पानी की आवक बढ़ गई। जलस्तर बढ़ने के बाद मंगलवार सुबह करीब 6 बजे वियर का एक जलद्वार खोला गया।
मोहिनी पिकअप वियर में कुल 13 गेट हैं, लेकिन फिलहाल केवल एक गेट से पानी छोड़ा जा रहा है। इस गेट के माध्यम से करीब 52.64 क्यूमेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है।
वियर से छोड़ा गया पानी आगे सिंध नदी में पहुंचेगा। इसके चलते नदी के जलस्तर और बहाव में बदलाव आने की संभावना है।
इन इलाकों पर पड़ सकता है असर
मोहिनी पिकअप वियर से पानी छोड़े जाने के बाद सिंध नदी के आसपास के कई क्षेत्रों में इसका असर पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से ख्यावदा, साबोली, सुडा, धमधौली, सीहोर, निहाबारा, सूड, पनघटा, मगरोनी और पुलाहा सहित आसपास के क्षेत्रों को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
नदी में पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों और नदी किनारे स्थित रास्तों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में ग्रामीणों से नदी के जलस्तर और बहाव को हल्के में नहीं लेने की अपील की गई है।
मढ़ीखेड़ा बांध भी तेजी से भर रहा
दूसरी ओर लगातार बारिश के कारण अटल सागर मढ़ीखेड़ा बांध में भी पानी की आवक लगातार बनी हुई है। मंगलवार सुबह 11 बजे तक बांध का जलस्तर 344.95 मीटर दर्ज किया गया।
बांध का पूर्ण जलाशय स्तर 346.25 मीटर है। यानी बांध अपने अधिकतम स्तर के काफी करीब पहुंच चुका है। वर्तमान जलसंग्रहण 745.49 एमसीयूएम दर्ज किया गया है, जो बांध की कुल क्षमता का 89.30 प्रतिशत है।
बांध के 89 प्रतिशत से अधिक भर जाने के बाद बारिश और पानी की आवक पर निगाहें और ज्यादा टिक गई हैं।
मुख्य गेट फिलहाल बंद, पावर हाउस से जारी डिस्चार्ज
फिलहाल मढ़ीखेड़ा बांध के मुख्य गेट बंद हैं और मुख्य गेटों से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। हालांकि बांध के पावर हाउस के माध्यम से करीब 101.56 क्यूमेक पानी लगातार छोड़ा जा रहा है।
यदि आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रहता है और बांध में पानी की आवक इसी तरह बढ़ती रही, तो जलस्तर पूर्ण जलाशय स्तर के करीब पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में जल संसाधन विभाग को बांध के मुख्य गेट खोलने का निर्णय लेना पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल मुख्य गेट खोलने को लेकर कोई स्थिति नहीं बनी है और जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
बारिश ने बढ़ाई जल संरचनाओं की चिंता
शिवपुरी जिले में पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण जहां किसानों को राहत मिली है, वहीं जलाशयों और नदियों में बढ़ती पानी की आवक ने प्रशासन के सामने निगरानी की चुनौती भी बढ़ा दी है।
मोहिनी वियर का गेट खुलना इस सीजन में जलस्तर बढ़ने का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। वहीं मढ़ीखेड़ा बांध का 89.30 प्रतिशत भर जाना भी आने वाले दिनों में जल प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
यदि बारिश लगातार जारी रहती है तो बांध और वियर दोनों में पानी की आवक और बढ़ सकती है।
नदी किनारे रहने वालों को अलर्ट
सिंध नदी में पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने नदी किनारे और संभावित डूब क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
लोगों से कहा गया है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें। खासकर बच्चे और युवा नदी में नहाने या तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने का जोखिम न लें। किसानों और ग्रामीणों को भी नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन की चिंता सिर्फ नदी के वर्तमान बहाव को लेकर नहीं है, बल्कि लगातार बारिश की स्थिति में अचानक जलस्तर बढ़ने की संभावना को लेकर भी है।
अब निगाहें बारिश और मढ़ीखेड़ा के जलस्तर पर
फिलहाल मोहिनी वियर का एक गेट खुल चुका है और सिंध नदी में 52.64 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं मढ़ीखेड़ा बांध 89.30 प्रतिशत भर चुका है और पावर हाउस से 101.56 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है।
अब आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और जल आवक यह तय करेगी कि बांध का जलस्तर किस दिशा में जाता है। अगर पानी की आवक तेजी से बढ़ी तो मुख्य गेट खोलने की नौबत भी आ सकती है।
फिलहाल जल संसाधन विभाग और प्रशासन की नजर जलस्तर पर बनी हुई है। एक तरफ बारिश से जिले के जलस्रोत लबालब हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ सिंध नदी में छोड़ा गया पानी नदी किनारे बसे इलाकों के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रहा है। इसलिए लोगों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी संदेश यही है—नदी और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखें और प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लें।