मंडियों में 4 से 4.5 हजार का भाव:समर्थन मूल्य 7,517 रुपए… किसानों ने उठाई मूंगफली खरीदी की मांग

Nikk Pandit
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खबर:शिवपुरी जिले में मूंगफली की फसल को लेकर किसानों की चिंता अब प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गई है। मंडियों में मूंगफली के कम भाव मिलने और सरकारी खरीदी की व्यवस्था शुरू नहीं होने के विरोध में किसान नेता एवं जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष मान सिंह फौजी ने मंगलवार को एसडीएम करैरा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन कलेक्टर के नाम दिया गया, जिसमें किसानों के लिए मूंगफली का शासकीय पंजीयन तत्काल शुरू कराने और समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है।

किसानों का कहना है कि इस वर्ष बारिश और मौसम की स्थिति अनुकूल रहने के कारण मूंगफली की अच्छी पैदावार की उम्मीद है। ऐसे में यदि फसल मंडियों में बड़ी मात्रा में पहुंचती है और सरकारी खरीदी शुरू नहीं होती, तो किसानों को मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ सकती है।

सबसे बड़ा सवाल समर्थन मूल्य और मंडी भाव के बीच के भारी अंतर को लेकर है। किसान नेता के अनुसार वर्तमान में मंडियों में मूंगफली का भाव करीब 4 हजार से 4 हजार 500 रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,517 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

7,517 का समर्थन मूल्य, फिर किसान को 4 हजार क्यों?

किसान नेता मान सिंह फौजी ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार और प्रशासन के सामने यही सवाल खड़ा किया है कि जब मूंगफली का समर्थन मूल्य 7,517 रुपए प्रति क्विंटल तय है, तो किसानों को मंडियों में इसके मुकाबले काफी कम दाम क्यों मिल रहा है।

उनका कहना है कि बाजार भाव और समर्थन मूल्य में हजारों रुपए का अंतर होने के कारण किसान को अपनी उपज बेचते समय बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

फौजी ने आरोप लगाया कि मंडियों में बिचौलियों की भूमिका के चलते किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए, जिसमें किसान अपनी मूंगफली सीधे सरकारी खरीदी केंद्र पर समर्थन मूल्य पर बेच सके।

शिवपुरी में बड़े पैमाने पर होती है मूंगफली की खेती
किसान नेता ने बताया कि शिवपुरी जिला मूंगफली उत्पादन के लिए अपनी अलग पहचान रखता है। करैरा, नरवर, पोहरी सहित जिले के कई क्षेत्रों में किसान बड़े पैमाने पर मूंगफली की खेती करते हैं

ऐसे में सरकारी स्तर पर खरीदी की व्यवस्था नहीं होने का असर जिले के बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ सकता है। किसानों की मांग है कि फसल मंडियों में पहुंचने से पहले ही पंजीयन और खरीदी केंद्रों को लेकर पूरी व्यवस्था स्पष्ट कर दी जाए, ताकि उन्हें अंतिम समय पर परेशानी का सामना न करना पड़े।

पहले भी उठ चुकी है मांग, अब तक नहीं बनी व्यवस्था
मान सिंह फौजी ने बताया कि मूंगफली की समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर वर्ष 2024 में भी कलेक्टर के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को पत्र भेजा गया था।

उस दौरान भी किसानों के लिए मूंगफली का सरकारी पंजीयन शुरू कराने और सोयाबीन व गेहूं की तर्ज पर सरकारी खरीदी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई थी। किसान नेता का कहना है कि इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस व्यवस्था सामने नहीं आई है। अब एक बार फिर किसानों की फसल तैयार होने के दौर में यह मांग उठाई गई है।

अच्छी फसल की उम्मीद, लेकिन कम दाम की चिंता
इस साल अच्छे मानसून के चलते किसानों को मूंगफली की अच्छी पैदावार की उम्मीद है। खेतों में फसल तैयार होने के साथ किसानों की निगाह अब बाजार भाव और सरकारी खरीदी व्यवस्था पर टिक गई है।

किसानों को डर है कि यदि एक साथ बड़ी मात्रा में मूंगफली मंडियों में पहुंची और सरकारी खरीदी केंद्र नहीं खुले तो बाजार में भाव और गिर सकते हैं। ऐसी स्थिति में किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो सकता है।

किसानों का कहना है कि खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने पर खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।

पंजीयन शुरू कराने और खरीदी केंद्र खोलने की मांग
ज्ञापन में किसानों ने प्रमुख रूप से मूंगफली का शासकीय पंजीयन तत्काल शुरू कराने, समर्थन मूल्य 7,517 रुपए प्रति क्विंटल पर खरीदी के लिए सरकारी केंद्र खोलने और बिचौलियों की भूमिका खत्म कर सीधे किसानों से उपज खरीदने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि यदि सरकारी खरीदी की व्यवस्था समय पर शुरू होती है तो उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए निजी व्यापारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और समर्थन मूल्य का लाभ भी मिल सकेगा।

10 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के बाद किसान नेता मान सिंह फौजी ने प्रशासन को 10 दिन का समय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में मूंगफली के शासकीय पंजीयन और समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था शुरू नहीं की गई, तो जिले के किसान एकजुट होकर आंदोलन करेंगे।

फौजी ने कहा कि किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिलना उसका अधिकार है। सरकार द्वारा समर्थन मूल्य घोषित किए जाने के बाद उस मूल्य पर खरीदी की प्रभावी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

किसानों के सामने अब सरकार के फैसले का इंतजार
ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब किसानों की निगाह प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है एक ओर मंडियों में कम भाव मिलने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर किसान समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी की मांग कर रहे हैं।

यदि समय रहते पंजीयन शुरू होता है और खरीदी केंद्र स्थापित किए जाते हैं, तो किसानों को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि व्यवस्था में देरी हुई तो फसल की आवक बढ़ने के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ सकती है।

ज्ञापन के दौरान गजेंद्र लोधी टीला, नितेंद्र लोधी मछावली, विशाल लोधी, आनंद लोधी, रामहेत सहित क्षेत्र के कई किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

फिलहाल किसानों ने 10 दिन का अल्टीमेटम देकर प्रशासन को साफ संदेश दे दिया है—मूंगफली की फसल का उचित दाम चाहिए, वरना सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
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