खुशबू शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले में हाईवे पर खुले में घूमते और सड़क पर बैठे गौवंश अब सिर्फ यातायात के लिए परेशानी नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगियों के लिए भी बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। बुधवार की रात सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने सड़क सुरक्षा और गौवंश प्रबंधन की व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए।
ग्वालियर से बाइक पर अपने घर शिवपुरी लौट रहे 38 वर्षीय विकास भार्गव की सड़क पर बैठे बैल से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार विकास गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि बैल ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया। गंभीर हालत में विकास को हाईवे एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज शिवपुरी पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
घर लौट रहा था परिवार का सहारा, रास्ते में थम गई जिंदगी
जानकारी के अनुसार खेड़ापति कॉलोनी, शिवपुरी निवासी विकास भार्गव पिता विनोद भार्गव बुधवार को किसी काम से बाइक से ग्वालियर गए थे। रात करीब 8 बजे वे ग्वालियर से शिवपुरी वापस लौट रहे थे। मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास सड़क पर बैठे बैल पर उनकी नजर संभवतः समय रहते नहीं पड़ सकी और बाइक सीधे बैल से जा टकराई।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल विकास को तत्काल हाईवे एंबुलेंस की मदद से मेडिकल कॉलेज शिवपुरी भेजा गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
एक तरफ परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, वहीं दूसरी तरफ हादसे में उस गौवंश की भी जान चली गई, जो सड़क पर बैठा था।
एक दिन में दो हादसे, 7 गौवंश की मौत
इस हादसे की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इसी बुधवार की सुबह सतनबाड़ा थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर गौवंश के कारण एक और बड़ा हादसा सामने आया था।
बताया गया कि सड़क पर मौजूद 8 गौवंश से कार टकरा गई थी। हादसे में 6 गौवंश की मौत हो गई, जबकि 2 घायल हुए। कार में उत्तर प्रदेश के दो लोग सवार थे। टक्कर के बाद दोनों कार में फंस गए थे, जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।
सुबह के हादसे के कुछ ही घंटे बाद रात में सुभाषपुरा क्षेत्र में बाइक और बैल की टक्कर ने एक इंसानी जिंदगी भी छीन ली। यानी एक ही दिन में सड़क हादसों में 7 गौवंश की मौत और एक युवक की जान जाने की घटना सामने आई।
आदेश कागजों में, हाईवे पर जिंदगी और गौवंश दोनों खतरे में?
जिले में सड़कों और हाईवे से गौवंश को हटाने के लिए प्रशासन की ओर से निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद प्रमुख सड़कों और हाईवे पर जगह-जगह गौवंश बैठे दिखाई देते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आदेशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हो पा रहा है?
रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक सड़क पर बैठे पशु आ जाएं तो वाहन चालक के पास संभलने का मौका बेहद कम रह जाता है। ऐसे में हादसे सिर्फ पशुओं की मौत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इंसानी जिंदगी भी इसकी कीमत चुकाती है।
सड़क पर बैठे गौवंश का मुद्दा अब सिर्फ व्यवस्था का नहीं, जिंदगी का सवाल
लगातार सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि हाईवे पर आवारा गौवंश की समस्या को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। एक ओर गौवंश हादसों में मारे जा रहे हैं, दूसरी ओर वाहन चालक और राहगीर भी अपनी जान गंवा रहे हैं।
विकास भार्गव की मौत ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि हादसा कैसे हुआ, बल्कि सवाल यह भी है कि अगर सड़क पर गौवंश को रोकने और हटाने की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती, तो क्या ऐसी दर्दनाक घटनाओं को टाला जा सकता था?
लगातार हो रहे हादसों के बीच हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था, गौवंश प्रबंधन और प्रशासनिक निर्देशों के प्रभावी पालन को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
शिवपुरी फर्स्ट की पड़ताल में सामने आए इन घटनाक्रमों ने एक कड़वा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—सड़क आखिर इंसानों के लिए है या फिर उस पर बैठे गौवंश के बीच जिंदगी बचाने की जद्दोजहद के लिए?