कोलारस में राधाष्टमी की धूम:मिनी वृंदावन में आधी रात तक गूंजते रहे राधा-कृष्ण के जयकारे:हजारों श्रद्धालुओं ने लिया चल समारोह में हिस्सा

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले के मिनी वृंदावन कहे जाने वाले कोलारस में शनिवार की रात राधाष्टमी का पर्व आस्था, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। राधा-कृष्ण की भक्ति में डूबे हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में शहर में पारंपरिक भव्य चल समारोह निकाला गया। शाम से शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन रात करीब 12 बजे तक चलता रहा। पूरे रास्ते राधा-कृष्ण के जयकारों से कोलारस नगरी गूंजती रही और वातावरण पूरी तरह ब्रजमय नजर आया।

चल समारोह में भगवान राधा-कृष्ण की मूर्तियों को आकर्षक विमान में विराजमान कर पूरे शहर में भ्रमण कराया गया। जैसे-जैसे शोभायात्रा आगे बढ़ती गई, श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ती गई। शहनाई की मधुर धुन, बैंड की आवाज और डीजे पर बजते भक्ति गीतों के बीच युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग श्रद्धालु नाचते-झूमते नजर आए।

गोपाल जी मंदिर से शुरू हुआ भव्य आयोजन

राधाष्टमी के अवसर पर शनिवार शाम करीब 6 बजे गोपाल जी मंदिर से चल समारोह की शुरुआत हुई। इससे पहले मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। पूजा के बाद भगवान राधा-कृष्ण की मूर्तियों को विशेष रूप से सजाए गए विमान में विराजमान किया गया।

इसके बाद श्रद्धालुओं और आयोजन समिति की मौजूदगी में चल समारोह आगे बढ़ा। शोभायात्रा कोलारस बस्ती, रामेश्वरम धाम, जगतपुर तिराहा, एबी रोड, एप्रोच रोड और सदर बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी।

चल समारोह के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन किए। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। वहीं लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान राधा-कृष्ण का आशीर्वाद लिया।

जयकारों से गूंज उठा पूरा शहर

चल समारोह जैसे-जैसे आगे बढ़ा, माहौल भक्तिमय होता चला गया। ‘राधे-राधे’ और ‘राधा-कृष्ण’ के जयकारों से पूरा शहर गूंजता रहा। बैंड और शहनाई की धुन पर श्रद्धालु झूमते दिखाई दिए। युवाओं में खासा उत्साह नजर आया। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी चल समारोह का हिस्सा बने।

कोलारस के प्रमुख बाजारों और मार्गों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी। कई लोग अपने परिवार के साथ शोभायात्रा देखने पहुंचे। श्रद्धालुओं में भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन करने और चल समारोह में शामिल होने को लेकर खासा उत्साह नजर आया।

श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह जलपान की व्यवस्था
चल समारोह में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर में जगह-जगह जलपान और ठंडे पेय की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों और आयोजन से जुड़े लोगों ने श्रद्धालुओं को पानी एवं अन्य पेय पदार्थ वितरित किए।

लंबे समय तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में किसी श्रद्धालु को परेशानी न हो, इसके लिए रास्ते में विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाएं की गई थीं। पूरा शहर धार्मिक आयोजन की रौनक में रंगा नजर आया।

छह घंटे तक शहर में घूमता रहा चल समारोह

गोपाल जी मंदिर से शाम करीब 6 बजे शुरू हुआ चल समारोह लगभग छह घंटे तक शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा। रात करीब 12 बजे भगवान राधा-कृष्ण का विमान वापस गोपाल जी मंदिर पहुंचा।

मंदिर पहुंचने के बाद भगवान राधा-कृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया। आरती और प्रसाद वितरण के साथ राधाष्टमी का यह भव्य आयोजन संपन्न हुआ।

एक महीने पहले से शुरू हो जाती हैं तैयारियां

कोलारस में राधाष्टमी के अवसर पर चल समारोह निकालने की परंपरा काफी पुरानी है। हर साल आयोजन समिति द्वारा इसकी तैयारियां करीब एक महीने पहले से शुरू कर दी जाती हैं। राधाष्टमी के दिन मंदिरों के साथ-साथ चल समारोह के पूरे मार्ग को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी लाइटिंग से सजाया जाता है।

शहर में जगह-जगह की गई सजावट रात के समय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। रोशनी से जगमगाते मार्ग, फूलों से सजे मंदिर और राधा-कृष्ण की भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं ने पूरे माहौल को ब्रज की तर्ज पर भक्तिमय बना दिया।

मिनी वृंदावन में दिखा ब्रज जैसा नजारा

कोलारस को यूं ही ‘मिनी वृंदावन’ नहीं कहा जाता। राधाष्टमी के अवसर पर यहां का माहौल पूरी तरह ब्रज की याद दिलाता है। भगवान राधा-कृष्ण की भक्ति में डूबे श्रद्धालु, मंदिरों की सजावट, फूलों से सजे रास्ते, भक्ति संगीत और जयकारों के बीच निकला चल समारोह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।

राधाष्टमी के इस आयोजन में केवल कोलारस ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। देर रात तक शहर में धार्मिक उत्साह बना रहा।

राधाष्टमी की इस रात कोलारस में आस्था और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसमें पूरा शहर राधा-कृष्ण की भक्ति में रंगा नजर आया। छह घंटे तक निकला भव्य चल समारोह और आधी रात तक गूंजते जयकारे कोलारस की धार्मिक परंपरा और श्रद्धा की जीवंत तस्वीर पेश करते रहे।
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