खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र में शासकीय शराब दुकानों को लेकर चल रहा महिलाओं का विरोध अब लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को अमोल गांव में शराब दुकान बंद कराने पहुंची महिलाओं और पुलिस-आबकारी विभाग की संयुक्त टीम के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला इतना बिगड़ गया कि महिलाओं द्वारा लाठी-डंडे उठाकर पुलिस और आबकारी कर्मचारियों की ओर बढ़ने का आरोप है। घटनाक्रम के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें मौके पर हंगामे और तनाव की स्थिति दिखाई दे रही है।
घटना के बाद अमोला थाना पुलिस ने मौके पर मोर्चा संभाला। दोपहर तक गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। वहीं महिलाओं का कहना था कि वे शराब दुकान बंद कराने की मांग को लेकर मौके पर पहुंची थीं और लंबे समय से गांव में शराब बिक्री का विरोध कर रही हैं।
दुकान बंद कराने पहुंचीं महिलाएं, पहले से मौजूद थी टीम
जानकारी के अनुसार गुरुवार को महिलाओं के शराब दुकान पर पहुंचने से पहले ही पुलिस और आबकारी विभाग की टीम मौके पर मौजूद थी। महिलाओं ने पहुंचते ही शराब दुकान बंद कराने की मांग शुरू कर दी।
इसी दौरान महिलाओं और पुलिस-आबकारी टीम के बीच बातचीत को लेकर विवाद बढ़ गया। कुछ ही देर में माहौल गर्म हो गया और महिलाओं ने लाठियां उठा लीं। आरोप है कि महिलाओं ने पुलिस और आबकारी कर्मचारियों की ओर लाठियां लेकर बढ़ने का प्रयास किया।
स्थिति बिगड़ती देख टीम को पीछे हटना पड़ा। बाद में पुलिस ने मौके पर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। घटना के बाद गांव में काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा।
थाना प्रभारी ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता को देखते हुए अमोला थाना पुलिस ने मौके पर अपनी मौजूदगी बनाए रखी। थाना प्रभारी और पुलिस बल ने गांव में स्थिति पर नजर रखी तथा दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया।
पुलिस की प्राथमिकता मौके पर विवाद को और बढ़ने से रोकना रही। पुलिस ने महिलाओं से कानून हाथ में न लेने और किसी भी शिकायत के लिए प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया अपनाने की अपील की।
वहीं पुलिस की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि विवाद के दौरान किसी तरह की मारपीट, तोड़फोड़ या अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी घटना हुई है या नहीं। सामने आए वीडियो और मौके पर मौजूद लोगों से मिली जानकारी को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
आबकारी विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती
अमोला क्षेत्र में लगातार हो रहे विरोध के बीच आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। महिलाओं का लगातार दबाव है कि गांव और आबादी वाले क्षेत्रों से शराब की दुकानें हटाई जाएं।
दूसरी ओर शराब दुकानों की सुरक्षा और संचालन को लेकर शराब ठेकेदारों ने भी आबकारी विभाग के सामने अपनी परेशानी रखी है। ऐसे में आबकारी विभाग के सामने एक तरफ महिलाओं की मांग और दूसरी तरफ लाइसेंसी शराब दुकानों की सुरक्षा एवं संचालन की जिम्मेदारी है।
कुछ दिन पहले महिलाओं के विरोध के बाद आबकारी विभाग की ओर से दुकान को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के संबंध में आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई थी। लेकिन इसके बाद भी विरोध थमने के बजाय दूसरे गांवों तक पहुंच गया।
तीन दिनों से लगातार सामने आ रहे विरोध के मामले
अमोला थाना क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से शराब दुकानों को लेकर लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं।
8 सितंबर को नया अमोला नंबर-2 में महिलाओं ने शराब दुकान में प्रवेश कर वहां रखी शराब की पेटियां बाहर निकाल दी थीं। इसके बाद पेटियों में आग लगाए जाने की घटना सामने आई थी।
9 सितंबर को भी महिलाओं ने शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बताया गया कि आबकारी विभाग द्वारा पांच दिन में दुकान दूसरी जगह स्थानांतरित करने का आश्वासन दिए जाने के बाद महिलाएं शांत हुई थीं।
इसी दौरान देर रात थरखेड़ा गांव में भी शराब दुकान को लेकर महिलाओं का विरोध सामने आया। महिलाओं ने दुकान के अंदर रखी शराब की पेटियां बाहर निकाल दीं और लाठियों से पेटियों पर हमला किया। अब गुरुवार को अमोल गांव में पुलिस-आबकारी टीम और महिलाओं के बीच विवाद होने से मामला और गंभीर हो गया है।
करीब एक महीने से शराब के खिलाफ अभियान
शिवपुरी जिले के अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं पिछले करीब एक महीने से अवैध और कच्ची शराब के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। पिछोर और खनियाधाना क्षेत्र में भी महिलाओं ने शराब बिक्री का विरोध किया था।
कई स्थानों पर महिलाओं ने कथित अवैध शराब को बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया था। कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान चक्काजाम जैसी स्थिति भी बनी।
महिलाओं का कहना है कि शराब की वजह से परिवारों में आर्थिक परेशानी, विवाद और घरेलू हिंसा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी कारण वे शराब बिक्री पर रोक लगाने और दुकानों को आबादी से दूर करने की मांग कर रही हैं।
ठेकेदारों ने लाइसेंस सरेंडर करने की दी चेतावनी
लगातार हो रही घटनाओं के बीच शराब ठेकेदारों ने भी अब अपना पक्ष सामने रखा है। ठेकेदारों ने जिला आबकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर लाइसेंस सरेंडर करने की बात कही है।
ठेकेदारों का आरोप है कि पिछले तीन दिनों में नया अमोला, थरखेड़ा, अमोल, मायापुर और खोड़ की शासकीय शराब दुकानों पर तोड़फोड़ और लूटपाट जैसी घटनाएं हुई हैं। उनका कहना है कि यदि शराब दुकानों की सुरक्षा नहीं हो सकती तो उनके लिए कारोबार संचालित करना मुश्किल है।
ठेकेदारों ने प्रशासन पर कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए आर्थिक नुकसान की बात कही है।
अब पुलिस और आबकारी विभाग के सामने दोहरी चुनौती
अमोला क्षेत्र में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पुलिस और आबकारी विभाग दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर महिलाएं शराब दुकानों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर लाइसेंसी दुकानों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अब सवाल यह है कि आबकारी विभाग महिलाओं को दिए गए दुकान स्थानांतरण के आश्वासन पर कब और क्या कार्रवाई करता है? वहीं पुलिस के सामने भी यह चुनौती है कि विरोध के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी पक्ष के साथ हिंसक टकराव की स्थिति दोबारा न बने।
फिलहाल अमोल गांव में पुलिस की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रित है, लेकिन शराब दुकानों को लेकर क्षेत्र में बढ़ते विरोध के कारण आने वाले दिनों में प्रशासन के फैसले पर सभी की नजर बनी हुई है।