कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर जनजातीय और सुदूर इलाकों में विशेष स्वास्थ्य शिविर:मौसमी व जलजनित बीमारियों से बचाव की दी जानकारी

Nikk Pandit
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खुशबु शर्मा खबर:शिवपुरी जिले में अतिवृष्टि के बाद प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। बारिश और जलभराव के बीच मौसमी एवं जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को गांव और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा के निर्देश पर आयुष विभाग द्वारा जनजातीय एवं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष आयुर्वेद चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए। शिविरों में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई और जरूरत के मुताबिक उन्हें निःशुल्क औषधियां उपलब्ध कराई गईं।

अतिवृष्टि के बाद आमतौर पर दूषित पानी, जलभराव, मच्छरों की बढ़ती संख्या और मौसम में बदलाव के कारण कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में केवल राहत एवं व्यवस्थाओं तक सीमित रहने के बजाय स्वास्थ्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता में रखा है। कलेक्टर श्री वर्मा ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित, संवेदनशील और सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच लगातार बनी रहे तथा ग्रामीणों को समय पर जांच, उपचार और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

गुड़र और छर्च के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंची स्वास्थ्य टीम
निर्देशों के परिपालन में आयुष विभाग द्वारा रविवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर गुड़र तथा शासकीय आयुर्वेद औषधालय छर्च के अंतर्गत आने वाले स्थानीय जनजातीय ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष आयुर्वेद चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में विभागीय चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य अमले ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया।

शिविर में आने वाले लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझते हुए आवश्यक परामर्श दिया गया। जिन लोगों को औषधियों की आवश्यकता थी, उन्हें विभाग की ओर से निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिला।

बारिश के बाद बीमारी का खतरा, ग्रामीणों को किया जागरूक

आयुष विभाग की टीमों ने स्वास्थ्य परीक्षण के साथ ग्रामीणों को बारिश के बाद होने वाली मौसमी एवं जलजनित बीमारियों से बचाव के तरीके भी बताए। ग्रामीणों को साफ पानी के उपयोग, आसपास स्वच्छता बनाए रखने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई।

बारिश के मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ वातावरण कई बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी शिविर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। चिकित्सकों ने लोगों को अपनी दिनचर्या और खान-पान को लेकर भी आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया।

सुदूर इलाकों पर विशेष नजर

अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में कई गांव और बस्तियां ऐसी हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आसान नहीं है। विशेष रूप से जनजातीय एवं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती रहती है। इसी को देखते हुए आयुष विभाग की टीमों द्वारा शिविर लगाकर स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के नजदीक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशासन का फोकस ऐसे क्षेत्रों पर है जहां बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और बीमारी फैलने की आशंका अधिक हो सकती है। शिविरों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण के साथ लोगों को रोगों से बचाव की जानकारी भी दी जा रही है।

सिर्फ दवा नहीं, बचाव का संदेश भी

इन स्वास्थ्य शिविरों की खास बात यह रही कि यहां
 केवल मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने तक गतिविधियां सीमित नहीं रहीं। स्वास्थ्य अमले ने ग्रामीणों को बीमारी से बचने के लिए जरूरी सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी। यानी प्रशासन का प्रयास बीमारी होने के बाद इलाज करने के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम पर भी जोर देने का है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत करने के लिए लोगों को मौसम के अनुरूप सावधानी बरतने और किसी भी स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई। चिकित्सकों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन भी दिया।

कलेक्टर बोले—लगातार जारी रहेंगी स्वास्थ्य सेवाएं

कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने स्पष्ट किया है कि अतिवृष्टि से प्रभावित, सुदूर एवं संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का यह विस्तार लगातार जारी रखा जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि बारिश और अतिवृष्टि के कारण किसी भी प्रभावित परिवार को स्वास्थ्य सुविधा के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

कलेक्टर के निर्देश के बाद आयुष विभाग द्वारा ऐसे क्षेत्रों में शिविरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि जरूरतमंद लोगों को समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक औषधियां और बीमारी से बचाव संबंधी जानकारी मिल सके।

ग्रामीणों को राहत, प्रशासन की सक्रियता का संदेश
अतिवृष्टि के बाद गांवों में पहुंचकर स्वास्थ्य जांच और निशुल्क दवा वितरण की पहल ग्रामीणों के लिए राहत देने वाली है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में समय लगता है, वहां चिकित्सा शिविर लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर तत्काल स्वास्थ्य सुविधा का माध्यम बन रहे हैं।

आयुष विभाग के इन शिविरों से यह संदेश भी स्पष्ट है कि प्रशासन अतिवृष्टि के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को लेकर सतर्क है। गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, समय पर जांच, निशुल्क दवाएं और बीमारी से बचाव की जानकारी—इन चार मोर्चों पर प्रशासन ने अपना फोकस बढ़ाया है।

आने वाले दिनों में भी अतिवृष्टि प्रभावित और संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर बनाए रखने की दिशा में काम जारी रहने की बात प्रशासन ने कही है।
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