खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले से गुजरने वाले NH-46 पर एक बार फिर सड़क पर गौवंश की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को बदरवास थाना क्षेत्र में हाईवे के करीब 6 किलोमीटर के हिस्से में अलग-अलग स्थानों पर 8 गौवंश मृत हालत में मिले। एक ही दिन और लगभग एक ही मार्ग पर इतनी बड़ी संख्या में गौवंश की मौत ने सड़क सुरक्षा और हाईवे पर घूमने वाले पशुओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृत गौवंश श्रीपुर गांव से ईश्वरी पुल के बीच अलग-अलग स्थानों पर सड़क किनारे और हाईवे पर मिले। सूचना मिलने के बाद सनातनी गौ सेवा समिति की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सड़क पर पड़े मृत गौवंश को हटाकर किनारे किया, ताकि तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से कोई और हादसा न हो।
6 किलोमीटर के रास्ते में बिखरे मिले मौत के निशान
जानकारी के अनुसार मंगलवार को NH-46 पर श्रीपुर से ईश्वरी पुल की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहन चालकों और स्थानीय लोगों ने अलग-अलग स्थानों पर गौवंश को मृत पड़ा देखा। जब इसकी जानकारी सनातनी गौ सेवा समिति तक पहुंची तो समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे।
टीम को करीब 6 किलोमीटर के दायरे में 8 मृत गौवंश मिले। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इनकी मौत सड़क हादसों में वाहनों की चपेट में आने से हुई है। हालांकि प्रत्येक मामले में मौत की परिस्थितियों की अलग-अलग पुष्टि आवश्यक होगी।
हाईवे पर पड़े शव खुद भी एक नए हादसे का कारण बन सकते थे। तेज रफ्तार से आने वाले वाहन चालकों को अचानक सड़क पर पड़ा पशु दिखाई देने पर वाहन संभालना मुश्किल हो सकता है। इसी खतरे को देखते हुए समिति के सदस्यों ने मृत गौवंश को सड़क से हटाकर किनारे किया।
एक हादसा नहीं, हादसों की पूरी कहानी
NH-46 पर यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। जिले में हाईवे और प्रमुख सड़कों पर वाहनों की चपेट में आने से गौवंश की मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं।
पिछले गुरुवार को भी सतनबाड़ा थाना क्षेत्र में NH-46 पर 6 गौवंश की मौत की घटना सामने आई थी। उस हादसे में कार में सवार दो लोग घायल भी हुए थे। यानी सड़क पर बैठे या घूमते गौवंश केवल खुद ही हादसे का शिकार नहीं हो रहे, बल्कि कई बार उन्हें बचाने के प्रयास में वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
बैल से टकराई बाइक, युवक की भी चली गई जान
कुछ समय पहले सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में मुढखेड़ा टोल प्लाजा के पास बाइक और बैल की टक्कर का मामला भी सामने आया था। हादसे में बैल की मौत हो गई थी, जबकि बाइक सवार विकास भार्गव की भी जान चली गई थी।
ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि हाईवे पर खुले में घूमने वाले गौवंश और दूसरे पशुओं की सुरक्षा के लिए जमीन पर कितनी प्रभावी व्यवस्था मौजूद है।
बताया गया है कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं में मृत गौवंश की संख्या अब करीब 50 तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा के साथ-साथ पशु प्रबंधन की चुनौती को भी सामने रखता है।
कलेक्टर के निर्देश के बाद भी हाईवे पर घूम रहा गौवंश
सड़कों पर बैठे और घूमते गौवंश के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए कलेक्टर की ओर से अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद हाईवे और जिले की अन्य प्रमुख सड़कों पर बड़ी संख्या में गौवंश दिखाई दे रहा है।
सबसे बड़ा खतरा रात के समय पैदा होता है। अंधेरे में सड़क पर बैठे काले या गहरे रंग के पशु वाहन चालकों को देर से दिखाई देते हैं। हाईवे पर वाहनों की रफ्तार अधिक होने के कारण चालक को ब्रेक लगाने या दिशा बदलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। परिणाम कई बार पशु और वाहन दोनों के लिए घातक साबित होता है।
आखिर जिम्मेदारी किसकी?
बदरवास में एक ही दिन में 8 गौवंश की मौत के बाद अब सवाल सिर्फ इन मृत पशुओं को सड़क से हटाने का नहीं है। असली चुनौती यह है कि गौवंश हाईवे तक पहुंच ही क्यों रहा है और उन्हें सड़क से दूर रखने की स्थायी व्यवस्था कब होगी?
स्थानीय स्तर पर पशु मालिकों की जिम्मेदारी, नगर एवं ग्रामीण निकायों की भूमिका, गौशालाओं की क्षमता और हाईवे से जुड़े सुरक्षा इंतजाम—इन सभी पहलुओं पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
अगर सड़क से मृत गौवंश हटाने के बाद भी जीवित गौवंश हाईवे पर बैठते और घूमते रहे, तो समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाएगा। इसके लिए नियमित निगरानी, पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने जैसी व्यवस्थाएं जरूरी होंगी।
समिति की तत्परता से टला दूसरा खतरा
मंगलवार को सनातनी गौ सेवा समिति की टीम ने मौके पर पहुंचकर मृत गौवंश को सड़क से हटाया। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि सड़क पर पड़े शव दूसरे वाहन चालकों के लिए भी खतरा बन सकते थे।
लेकिन यह घटना एक बड़ा संदेश छोड़ गई है—हाईवे सिर्फ वाहनों के लिए नहीं, बल्कि वहां मौजूद हर जीवन की सुरक्षा से जुड़ा मार्ग है। एक ही दिन में 8 गौवंश की मौत और पहले सामने आए हादसों के बाद अब सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस हो रही है।
बदरवास के श्रीपुर से ईश्वरी पुल के बीच हुई यह घटना सवाल छोड़ गई है कि आखिर हाईवे पर गौवंश की मौत का सिलसिला कब रुकेगा? कलेक्टर के निर्देशों के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन इस समस्या की रोकथाम के लिए क्या प्रभावी कदम उठाते हैं।