खुशबू शर्मा ईसीजी:खबर शिवपुरी शहर में नशे के कारोबार और सेवन से जुड़े दो वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक वीडियो में लुधावली क्षेत्र के वार्ड नंबर 17 में कुछ युवक कथित तौर पर स्मैक की खरीद-बिक्री करते नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरे वीडियो में हवाई पट्टी के पास लगने वाली रेत मंडी क्षेत्र में एक युवक सड़क किनारे सिरिंज से नशा करता दिखाई दे रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस समय पुलिस प्रशासन जिले में ‘नशे से दूरी है जरूरी’ जैसे अभियान चलाकर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहा है, उसी शहर में यदि सार्वजनिक स्थानों पर नशे की खरीद-बिक्री और सेवन के वीडियो सामने आते हैं, तो आखिर स्थानीय स्तर पर निगरानी कितनी प्रभावी है?
यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था की प्रभावशीलता से जुड़ा है। सामने आए वीडियो की सत्यता, उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है।
VIDEO ने बढ़ाई चिंता, खुलेआम नशे का आरोप
पहला वीडियो लुधावली क्षेत्र के वार्ड नंबर 17 का बताया जा रहा है। वीडियो में कुछ युवक कथित रूप से स्मैक की खरीद-बिक्री करते दिखाई दे रहे हैं। यदि जांच में वीडियो वास्तविक पाया जाता है और उसमें दिखाई दे रहे युवकों की भूमिका की पुष्टि होती है, तो यह मामला बेहद गंभीर हो सकता है।
सवाल यह भी है कि जिस इलाके में इस तरह की
गतिविधियां होने का दावा किया जा रहा है, वहां पुलिस की नियमित गश्त और स्थानीय सूचना तंत्र कितना सक्रिय है? क्या पुलिस को क्षेत्र में नशे की गतिविधियों की पहले से कोई सूचना थी? अगर सूचना थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अगर सूचना नहीं थी तो पुलिस का स्थानीय इंटेलिजेंस नेटवर्क ऐसी गतिविधियों का पता लगाने में क्यों विफल रहा?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
दूसरा VIDEO और भी चिंताजनक
दूसरा वीडियो हवाई पट्टी के पास लगने वाली रेत मंडी का बताया जा रहा है। इसमें एक युवक सड़क किनारे बैठकर सिरिंज के जरिए नशा करता दिखाई दे रहा है।
वीडियो के अनुसार, वहां मौजूद दो लोगों ने युवक को पकड़ लिया और खुलेआम नशा करने को लेकर उसे फटकार लगाई। पूछताछ के दौरान युवक ने कथित तौर पर खुद को ईंट के कारोबार से जुड़ा बताया और फिजिकल थाना क्षेत्र का निवासी बताया।
अगर किसी सार्वजनिक स्थान पर इस तरह नशीले पदार्थ का सेवन हो रहा है, तो यह केवल एक युवक का मामला नहीं माना जा सकता। इसके पीछे नशे की उपलब्धता, सप्लाई चैन और युवाओं तक पहुंच जैसे बड़े सवाल भी खड़े होते हैं।
अभियान बड़े-बड़े, लेकिन जमीन पर क्या?
शिवपुरी में पुलिस द्वारा ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे अभियानों का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से जागरूक करना और नशे के कारोबार पर कार्रवाई करना है।
लेकिन अब सामने आए वीडियो पुलिस के सामने एक अलग चुनौती खड़ी करते हैं।
एक तरफ मंचों से नशे के खिलाफ संदेश दिए जा रहे हैं, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और पुलिस नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करती है। दूसरी तरफ शहर के अलग-अलग इलाकों से कथित तौर पर नशे की खरीद-बिक्री और सेवन के वीडियो सामने आना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जागरूकता अभियान के साथ-साथ नशे की सप्लाई लाइन पर भी उतनी ही प्रभावी कार्रवाई हो रही है?
यही वह बिंदु है जिस पर पुलिस प्रशासन को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
देहात थाना प्रभारी विकास यादव का क्या कहना है?
वीडियो सामने आने के बाद देहात थाना प्रभारी विकास यादव ने बताया कि स्मैक बेचने और खरीदने से संबंधित एक वीडियो पुलिस के सामने आया है। पुलिस वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। पहचान होने के बाद मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का यह बयान महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ कुछ स्वाभाविक सवाल भी जुड़े हैं—वीडियो सामने आने के बाद पहचान की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होगी?
क्या वीडियो के स्रोत और स्थान की तकनीकी जांच होगी? क्या वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों से पूछताछ की जाएगी? क्या पुलिस यह भी पता लगाएगी कि कथित तौर पर स्मैक कहां से आई और इसे कौन उपलब्ध करा रहा है?
क्योंकि यदि केवल वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति तक कार्रवाई सीमित रह गई और सप्लाई करने वाले नेटवर्क तक पुलिस नहीं पहुंची, तो नशे के कारोबार की मूल समस्या बनी रह सकती है।
SP स्तर पर भी निगरानी की जरूरत
मामले में जिले के पुलिस अधीक्षक के स्तर पर भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नशे के खिलाफ चल रहे अभियान का वास्तविक असर जमीनी स्तर पर कितना है। थाना क्षेत्रों में नियमित गश्त, संदिग्ध स्थानों की निगरानी, मुखबिर तंत्र को सक्रिय करना और नशे की सप्लाई से जुड़े लोगों तक पहुंचना पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए।
यह किसी अधिकारी पर व्यक्तिगत आरोप लगाने का मामला नहीं है, बल्कि सामने आए वीडियो के आधार पर पुलिस व्यवस्था से जवाब मांगने का मामला है। यदि वीडियो सही हैं, तो पुलिस को यह बताना होगा कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी गतिविधियों की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सवाल सिर्फ दो युवकों का नहीं, पूरे सिस्टम का है
नशे के खिलाफ लड़ाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह सकती। किसी युवक को नशा करते पकड़ लेना एक कार्रवाई हो सकती है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब पुलिस यह पता लगाए कि नशीला पदार्थ उसके पास पहुंचा कैसे।
स्मैक बेचने वाला कौन है? सप्लाई कहां से आती है? कौन लोग इसे शहर में पहुंचा रहे हैं? किन इलाकों में इसकी बिक्री की शिकायतें हैं? क्या पुराने मामलों में सामने आए आरोपियों की गतिविधियों पर निगरानी हो रही है?
इन सवालों के जवाब नशे के नेटवर्क को समझने और तोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
‘नींद में पुलिस’ कहना आसान, जवाबदेही तय करना जरूरी
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा सकते हैं और यह भी कह सकते हैं कि ‘पुलिस सो रही है’, लेकिन पत्रकारिता का काम केवल आरोप लगाना नहीं, बल्कि जिम्मेदार सवाल उठाना है।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित होगा कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में जरूर है, लेकिन वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।
अब असली परीक्षा देहात थाना पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन की है। यदि वीडियो सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई केवल वीडियो में नजर आ रहे चेहरों तक सीमित न रहे, बल्कि कथित सप्लाई नेटवर्क की भी जांच हो। साथ ही पुलिस को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि शहर में सार्वजनिक स्थानों पर नशे की गतिविधियों को रोकने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
क्योंकि ‘नशे से दूरी है जरूरी’ का संदेश तभी प्रभावी होगा, जब नशा बेचने वालों तक पुलिस की दूरी भी कम हो।
शिवपुरी फर्स्ट की पड़ताल से उठते बड़े सवाल
क्या लुधावली के वीडियो की पुलिस तकनीकी जांच कराएगी?
वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की पहचान कब तक होगी?
कथित स्मैक की सप्लाई कहां से हो रही है?
हवाई पट्टी क्षेत्र में सार्वजनिक रूप से नशे की घटना कैसे सामने आई?
क्या संवेदनशील इलाकों में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी?
क्या नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल छोटे आरोपियों तक सीमित है या सप्लाई नेटवर्क तक भी पहुंचेगी?
‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के साथ नशे की सप्लाई पर प्रभावी कार्रवाई कब दिखाई देगी?
शिवपुरी फर्स्ट — सवाल जनता के, जवाबदेही प्रशासन की।