शिवपुरी। नगर पालिका आर्थिक संकट से जूझ रही है, लेकिन शहर में टैक्स वसूली की रफ्तार नहीं बढ़ पा रही। शहर के करीब 40 हजार रजिस्टर्ड मकानों और दुकानों से लगभग 10 करोड़ रुपए का टैक्स वसूलना है। इसके लिए नगर पालिका ने 6 सहायक राजस्व निरीक्षक (एआरआई) और एक राजस्व निरीक्षक (आरआई) को जिम्मेदारी सौंप रखी है। सभी को पीओएस मशीनें भी उपलब्ध कराई गई हैं, इसके बावजूद हर महीने करीब 30 लाख रुपए की ही वसूली हो पा रही है।
नगर पालिका की कमजोर वसूली का असर उसके आर्थिक प्रबंधन पर पड़ रहा है। वहीं, शहरवासियों से संपत्ति कर, स्वच्छता कर और अन्य शुल्क वसूलने की जिम्मेदारी संभालने वाला अमला अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है। बकायादारों में आम नागरिकों के साथ व्यापारी और कई शासकीय कार्यालय भी शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब वसूली के लिए पूरा अमला तैनात है, तो नगर पालिका के खजाने तक बकाया राशि क्यों नहीं पहुंच रही।
हर महीने एक करोड़ से ज्यादा वसूली का लक्ष्य, पहुंच रहे सिर्फ 30 लाख
नगर पालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती बकाया टैक्स की वसूली बढ़ाना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 10 करोड़ रुपए की राशि वसूलना बाकी है। वसूली की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं दिख रहा। नियम और निर्धारित लक्ष्यों के मुताबिक नियमित वसूली पर जोर दिया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान में शहरवासियों के खुद नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर टैक्स जमा करने पर ही अधिक निर्भरता दिखाई दे रही है।
6 एआरआई और एक आरआई की जिम्मेदारी
शहर के 39 वार्डों में टैक्स वसूली के लिए नगर पालिका में राजेश विरमानी, हरीबल्लभ चंदोरिया, हरीश शर्मा, किरण सोलंकी, प्रमोद शर्मा और गजेन्द्र जैन सहायक राजस्व निरीक्षक के रूप में पदस्थ हैं। वहीं, अरुण कुमार त्यागी राजस्व निरीक्षक हैं। प्रत्येक अधिकारी के साथ एक सहायक कर्मचारी भी दिया गया है।
इतना अमला होने के बावजूद यदि वसूली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच रही, तो फील्ड में निगरानी और बकायादारों से संपर्क की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। नगर पालिका प्रशासन के सामने अब वसूली की जिम्मेदारी तय करने और नियमित समीक्षा करने की चुनौती है।
आम लोगों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक बकाया
टैक्स बकाया केवल घरेलू संपत्तियों तक सीमित नहीं है। इसमें बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों और विभिन्न सरकारी विभागों की संपत्तियां भी शामिल बताई गई हैं। नगर पालिका के अनुसार, कई लोग मकान निर्माण, एनओसी या बैंक लोन जैसी जरूरत पड़ने पर टैक्स जमा करते हैं। ऐसे में नियमित वसूली के लिए बकायादारों तक पहुंचना जरूरी है।
नगर पालिका को संपत्ति कर, विकास शुल्क, स्वच्छता कर और सेवा कर सहित अलग-अलग मदों में राशि प्राप्त करनी होती है। घरेलू मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कर की दरें भी अलग हैं। उदाहरण के तौर पर स्वच्छता कर के रूप में घरों से 45 रुपए और दुकानों से 60 रुपए प्रतिमाह लिए जाते हैं।
40 हजार संपत्तियां, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड अब भी अधूरा
नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 40 हजार मकान और दुकानें रजिस्टर्ड हैं। अधिकारियों के अनुसार, टैक्सदाताओं का रिकॉर्ड ऑनलाइन करने की प्रक्रिया जारी है। अब तक करीब 10 हजार लोगों की आईडी बनाई जा चुकी हैं, जबकि 30 से 35 हजार लोगों की आईडी बनना बाकी है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम छह महीने और लग सकते हैं।
ऑनलाइन व्यवस्था पूरी होने के बाद करदाताओं को घर बैठे टैक्स जमा करने की सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, रिकॉर्ड डिजिटल होने तक नगर पालिका को मौजूदा संसाधनों से ही वसूली बढ़ाने की जरूरत है।
सीएमओ ने दिए प्रतिदिन 5 लाख वसूली के लक्ष्य
नगर पालिका सीएमओ यशवंत राठौर ने बताया कि सभी एआरआई को प्रतिदिन 5 लाख रुपए टैक्स वसूली का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन अधिकारी इसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए सिरे से आदेश जारी कर वसूली के निर्देश दिए जाएंगे। जो अधिकारी फील्ड में जाकर वसूली नहीं करेंगे, उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

