शिवपुरी में सहकारी बैंक घोटाले का नया मोड़: आरोपी के बाहर आने के बाद जांच और रिकवरी पर उठे सवाल, एक लाख से ज्यादा खाताधारक अपनी जमा पूंजी के इंतजार में

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राकेश पाराशर

शिवपुरी। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में 80.56 करोड़ रुपए के कथित गबन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में निलंबित चपरासी और प्रभारी कैशियर राकेश पाराशर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, जबकि बैंक के चार पूर्व महाप्रबंधक और कोर बैंकिंग प्रभारी प्रभात भार्गव अब भी फरार बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, बैंक के हजारों ग्राहकों की जमा राशि पर संकट बना हुआ है। मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गबन की राशि की वसूली कब होगी और खाताधारकों को उनकी रकम कब तक मिल पाएगी।


जमानत के बाद आरोपी के स्वागत का वीडियो वायरल


राकेश पाराशर को जमानत मिलने के बाद उनके समर्थकों द्वारा फूल-मालाओं से स्वागत किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। इससे बैंक घोटाले को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई की स्थिति अलग-अलग है।


चार पूर्व महाप्रबंधकों की गिरफ्तारी अब भी चुनौती


जनवरी 2022 में दर्ज 80.56 करोड़ रुपए के गबन मामले में कोर बैंकिंग प्रभारी प्रभात भार्गव और चार पूर्व महाप्रबंधक एएस कुशवाह, डीके सागर, वायके सिंह तथा लता कृष्णन की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इन आरोपियों की तलाश और गबन की रकम की रिकवरी जांच के अहम पहलू बने हुए हैं।


मामले में आरोप है कि गबन की राशि से वाहन, मकान, आभूषण और कृषि भूमि खरीदी गई। इसके अलावा कुछ बस ऑपरेटरों और ज्वैलर्स के खातों में भी बैंक की रकम ट्रांसफर होने की बात सामने आई थी। इन संपत्तियों और ट्रांसफर हुई राशि से कितनी वसूली हुई, इसे लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।


एक लाख से अधिक खाताधारकों की जमा राशि प्रभावित


बैंक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 1,00,901 खाताधारकों की कुल 265.65 करोड़ रुपए की जमा राशि का विवरण सामने आया है। इसमें 94,636 बचत खातों में 185.26 करोड़ रुपए, 5,595 एफडी में 79.66 करोड़ रुपए और 770 चालू खातों में 73 लाख रुपए जमा बताए गए हैं।


इसका मतलब है कि मामला केवल गबन की रकम तक सीमित नहीं है। बैंक में जमा अपनी बचत और एफडी की राशि को लेकर बड़ी संख्या में ग्राहक प्रभावित हैं। बैंक में निकासी का दबाव बढ़ने से नकदी की उपलब्धता को लेकर भी संकट की स्थिति बताई जा रही है।


दो एफआईआर और हिरासत की अवधि बनी जमानत का आधार


राकेश पाराशर के वकील की ओर से जमानत के पक्ष में अलग-अलग मामलों में हिरासत की अवधि और सह-आरोपी को जमानत मिलने जैसे आधार रखे गए। बताया गया कि बैंक गबन से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज होने के कारण कानूनी स्थिति अलग रही। वर्ष 2021 के मामले में सजा और वर्ष 2022 के 80.56 करोड़ रुपए के गबन मामले में हिरासत की अवधि को भी जमानत के पक्ष में आधार बनाया गया।


जांच अधिकारी बोले- एक-दो महीने में दिखेगी प्रगति


मामले के जांच अधिकारी एवं कोलारस एसडीओपी संजय मिश्रा के मुताबिक, एक ही बैंक गबन को लेकर दो एफआईआर दर्ज थीं। विवेचना अधिकारियों के बदलते रहने से जांच की गति प्रभावित हुई, लेकिन अब एक-दो महीने में मामले में बड़ी प्रगति देखने को मिल सकती है।


अब निगाहें इस बात पर हैं कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, कथित गबन से जुड़ी संपत्तियों की रिकवरी और खाताधारकों की जमा राशि को लेकर जांच एजेंसियां क्या ठोस कदम उठाती हैं। बैंक के ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि उनकी जमा पूंजी की वापसी का रास्ता कब साफ होगा।

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