11,268 करोड़ की पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की अपडेट डीपीआर दिल्ली भेजी, शिवपुरी, गुना और श्योपुर में बनेंगे 6 बांध

Shivpuri First
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सवा 2 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन को सिंचाई का लाभ देने की योजना; 789 गांवों को मिलेगा फायदा


शिवपुरी। मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में सिंचाई सुविधा बढ़ाने वाली पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है। परियोजना की अपडेट विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) दिल्ली भेज दी गई है। करीब 11,268 करोड़ रुपए की इस योजना के तहत शिवपुरी, गुना और श्योपुर क्षेत्र में छह बांध बनाए जाने प्रस्तावित हैं। इनसे सवा दो लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन को सिंचाई सुविधा से जोड़ने और 789 गांवों को लाभ पहुंचाने की योजना है।


परियोजना की डीपीआर को केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) से मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद टेंडर जारी करने और निर्माण कार्य की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकेंगे। फिलहाल परियोजना से जुड़े अधिकारियों को डीपीआर पर हरी झंडी मिलने का इंतजार है।


शिवपुरी के साथ गुना और श्योपुर को भी मिलेगा लाभ -


परियोजना के तहत ग्वालियर और चंबल संभाग के शिवपुरी, गुना और श्योपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई का रकबा बढ़ाने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित बांधों से शिवपुरी जिले के बैराड़, पोहरी, कोलारस और अन्य क्षेत्रों के गांवों को लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजना की रिपोर्ट के अनुसार, शिवपुरी जिले के 388 गांवों को सिंचाई सुविधा से जोड़ने की योजना है।


इसके अलावा मुरैना जिले के सबलगढ़, जौरा, मुरैना और कैलारस क्षेत्र के 168 गांव भी परियोजना से लाभान्वित हो सकते हैं। गुना और आसपास के क्षेत्रों के गांवों को भी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। परियोजना का उद्देश्य बारिश पर निर्भर खेती को राहत देना और सूखे के प्रभाव को कम करना है।


कूनो नदी पर भी बनेगा बांध -


प्रस्तावित छह बांधों में एक बांध श्योपुर क्षेत्र में कूनो नदी पर बनाया जाएगा। इससे करीब 27 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने की योजना है। इसके अलावा गुना जिले के नैनागढ़ में बैराज और धनवारी में बांध प्रस्तावित हैं। इनसे लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलने का अनुमान है।


शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र के सोनपुर में भी बांध बनाने की योजना है, जिससे करीब 19,400 हेक्टेयर जमीन सिंचित हो सकेगी। वहीं, पवा और कटीला बांधों का सिंचाई क्षेत्र बड़ा रहने की संभावना है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बड़े कृषि क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।


91 लघु सिंचाई परियोजनाएं भी होंगी तैयार -


मुख्य बांधों के अलावा परियोजना के तहत 91 लघु सिंचाई परियोजनाएं तैयार करने की भी योजना है। इनसे किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी। परियोजना पूरी होने पर संबंधित क्षेत्रों में खेती की निर्भरता केवल मानसून पर कम होने और कृषि उत्पादन को सहारा मिलने की उम्मीद है।


डीपीआर की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा काम -


परियोजना से जुड़े कार्यपालन यंत्री गिरीश साहू के अनुसार, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की अपडेट डीपीआर दिल्ली भेजी गई है। केंद्रीय जल आयोग से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना पर आगे काम किया जाएगा। इसके तहत शिवपुरी, गुना और श्योपुर क्षेत्र में छह बांध बनाए जाने की योजना है।


अब परियोजना की अगली प्रक्रिया केंद्रीय जल आयोग की मंजूरी पर निर्भर है। मंजूरी मिलने के बाद टेंडर और निर्माण संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है, हालांकि वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरा होने और परियोजना के संचालन के बाद ही मिल सकेगा।


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