30 दिन में वार्ड परिसीमन और आरक्षण की तैयारी, 39 से बढ़कर 60 हो सकते हैं वार्ड; प्रस्तावित सीमा में शिवपुरी और कोलारस जनपद के गांव शामिल, बनेगी नगर निगम

Shivpuri First
0


शिवपुरी। शहर को नगर निगम का दर्जा देने की प्रक्रिया में अब वार्डों के परिसीमन और आरक्षण की कवायद शुरू होने जा रही है। नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देशों के अनुसार, जिला प्रशासन को 30 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव शासन को भेजना है। प्रस्तावित योजना के तहत शिवपुरी नगर पालिका के 39 वार्डों की संख्या बढ़ाकर 60 की जा सकती है। इसके साथ ही शिवपुरी और कोलारस जनपद के 16 गांवों को नगर निगम की सीमा में शामिल करने की योजना है।


शिवपुरी को नगर निगम बनाने की घोषणा वर्ष 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पोलो ग्राउंड पर आयोजित सभा में की थी। इसके बाद 27 जून 2025 को तत्कालीन कलेक्टर के कार्यकाल में शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें शिवपुरी जनपद के 12 और कोलारस जनपद के चार गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी अब तक नगर निगम गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।


आबादी के हिसाब से होगा वार्डों का निर्धारण -


प्रस्ताव के अनुसार, नए वार्डों की औसत आबादी करीब 4,700 रखने की योजना है। इसमें 15 प्रतिशत तक कमी या बढ़ोतरी की गुंजाइश रखी जा सकती है। परिसीमन का उद्देश्य वार्डों के बीच आबादी के अंतर को कम करना और प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाना है। इसके बाद वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।


वर्तमान वार्डों की आबादी में बड़ा अंतर पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, वार्ड 15 की आबादी 14,783 थी, जबकि वार्ड 33 में केवल 1,815 लोग रहते थे। ऐसे में नए परिसीमन के दौरान आबादी को प्रमुख आधार बनाए जाने से वार्डों के आकार और जरूरतों में संतुलन लाने का प्रयास होगा।


इन 16 गांवों को जोड़ने की योजना -


प्रस्तावित नगर निगम सीमा में शिवपुरी जनपद के चंदनपुरा, नोहरीकला, सिंहनिवास, ठर्य, दर्रोनी, ईटमां, पिपरसमां, रायश्री, सतेरिया, बांसखेड़ी, बड़ागांव और रातौर गांव शामिल हैं। वहीं, कोलारस जनपद के पड़ौरा सड़क, सेसई सड़क, बेहटा और खोंकर को भी निगम क्षेत्र में जोड़ने की योजना है।


इन गांवों के शामिल होने से शहर का भौगोलिक दायरा बढ़ेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के शहरी प्रशासन में आने के बाद सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं को लेकर उम्मीदें भी बढ़ेंगी। हालांकि, इन सुविधाओं का विस्तार किस समयसीमा में होगा, यह नगर निगम गठन और आगे की कार्ययोजना पर निर्भर करेगा।


आबादी तीन लाख के पार होने का अनुमान -


शासन को भेजे गए पुराने प्रस्ताव में शिवपुरी शहर की आबादी करीब 2.24 लाख बताई गई थी। प्रस्तावित 16 गांवों की लगभग 48,542 आबादी जोड़ने पर कुल जनसंख्या 2.73 लाख के आसपास पहुंचती थी। वर्तमान में जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आबादी में बदलाव का अनुमान लगाया जा रहा है। यदि नए आंकड़ों में शहर की आबादी बढ़ी हुई सामने आती है, तो गांवों को जोड़ने के बाद प्रस्तावित निगम क्षेत्र की कुल आबादी तीन लाख से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।


दूर स्थित गांवों को लेकर भी उठ सकते हैं सवाल -


प्रस्तावित सूची में कोलारस जनपद के कुछ गांव शहर से करीब 18 से 20 किलोमीटर दूर बताए गए हैं। ऐसे में नगर निगम की सीमा तय करते समय भौगोलिक दूरी और प्रशासनिक व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी गांव को शामिल करने या बाहर रखने का फैसला संबंधित नियमों और शासन की मंजूरी के आधार पर ही होगा।


जिला प्रशासन की ओर से बताया गया है कि पूर्व में 16 ग्राम पंचायतों को शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। नए दिशा-निर्देश मिलने के बाद परिसीमन और आरक्षण की कार्रवाई निर्धारित समयसीमा में पूरी करने की तैयारी की जाएगी। अब आगे की प्रक्रिया और शासन के निर्णय पर शिवपुरी को नगर निगम का दर्जा मिलने की दिशा तय होगी।

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)