शिवपुरी। शहर के झांसी तिराहा स्थित गांधी पेट्रोल पंप की जमीन को लेकर नगर पालिका और पेट्रोल पंप संचालक के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर पालिका ने जमीन खाली कराने के लिए 22 सितंबर को अंतिम नोटिस जारी किया था। नोटिस में 2 अक्टूबर तक जमीन खाली कर नगर पालिका को सौंपने के निर्देश दिए गए थे। तय समय निकलने के बाद भी जमीन खाली नहीं होने पर नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने कार्रवाई में देरी को लेकर सीएमओ यशवंत राठौड़ की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
अध्यक्ष ने प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि नगर पालिका के पक्ष में फैसला आने के बाद भी जमीन खाली कराने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई गई। उन्होंने इसे नगर पालिका के राजस्व से जुड़ा मामला बताते हुए पूरे घटनाक्रम में अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। हालांकि, मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
1960 में 25 साल के लिए दी गई थी जमीन
नगर पालिका के मुताबिक झांसी तिराहा के पास स्थित जमीन वर्ष 1960 में मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स को 25 साल की लीज पर दी गई थी। इसके लिए 4472 रुपए प्रीमियम और 279.50 रुपए सालाना किराया तय किया गया था। इसी जमीन पर पेट्रोल पंप स्थापित किया गया, जिसका संचालन वर्तमान में समीर गांधी द्वारा किया जा रहा है।
लीज अवधि पूरी होने के बाद जमीन की लीज दोबारा रिन्यू नहीं होने की बात नगर पालिका की ओर से कही गई है। इसके बाद जमीन वापस लेने को लेकर नगर पालिका ने न्यायालय का रुख किया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद जारी हुआ नोटिस
मामले में हाईकोर्ट से नगर पालिका के पक्ष में फैसला आने के बाद जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। नगर पालिका ने 22 सितंबर को अंतिम नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे।
नोटिस में कहा गया था कि तय अवधि में जमीन खाली नहीं करने पर नगर पालिका नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जमीन को कब्जामुक्त कराएगी। साथ ही हर्जाना वसूलने की बात भी नोटिस में कही गई थी। नोटिस की समय सीमा 2 अक्टूबर को पूरी हो गई, लेकिन जमीन खाली नहीं हुई।
अध्यक्ष बोलीं- कार्रवाई में देरी से पालिका को नुकसान
नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने कहा कि जिस जमीन को कई दशक पहले लीज पर दिया गया था, वर्तमान में उसकी कीमत काफी अधिक है। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे मामले में नगर पालिका को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उन्होंने सीएमओ से जमीन खाली कराने को लेकर पत्राचार भी किया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अधिकारियों से मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
सीएमओ से नहीं हो सकी बात
इस मामले में सीएमओ यशवंत राठौड़ का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। इसलिए उनकी ओर से आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो पाई।
समीर गांधी बोले- सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन
पेट्रोल पंप संचालक समीर गांधी का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। उनके अनुसार, 6 अक्टूबर को मामले की सुनवाई प्रस्तावित है और नगर पालिका की ओर से केविएट भी लगाई गई है।
समीर गांधी का कहना है कि जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तब आगे की कार्रवाई कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही होनी चाहिए।
फिलहाल जमीन खाली कराने को लेकर नगर पालिका और पेट्रोल पंप संचालक का पक्ष अलग-अलग है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

