शिवपुरी के झांसी तिराहा स्थित गांधी पेट्रोल पंप की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। यहां मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स की ओर से लगाई गई याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक मामला आगे सुनने लायक ही नहीं माना गया और पहली सुनवाई में ही याचिका खारिज कर दी गई।
मामला नगर पालिका परिषद शिवपुरी और मुख्य नगर पालिका अधिकारी के खिलाफ लगाया गया था। 28 सितंबर को याचिका दाखिल हुई और 30 सितंबर को मामला दर्ज हुआ। 6 अक्टूबर को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के सामने सुनवाई हुई, जिसमें याचिका खारिज कर दी गई।
पंप के साथ करीब 3 बीघा जमीन भी
यह पूरा विवाद सिर्फ पेट्रोल पंप की जगह को लेकर नहीं है। पेट्रोल पंप के आसपास करीब 3 बीघा जमीन भी है, जिसे लेकर नगर पालिका और पेट्रोल पंप संचालक के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।
नगर पालिका के मुताबिक, वर्ष 1960 में यह जमीन मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स को 25 साल की लीज पर दी गई थी। इसके लिए 4,472 रुपए प्रीमियम और 279.50 रुपए सालाना किराया तय हुआ था। लीज खत्म होने के बाद इसे दोबारा नहीं कराया गया, लेकिन जमीन का कब्जा बना रहा।
हाईकोर्ट में पालिका के पक्ष में आया था फैसला
जमीन वापस लेने के लिए नगर पालिका ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट में नगर पालिका के पक्ष में फैसला आने के बाद जमीन खाली कराने का नोटिस जारी किया गया। 22 सितंबर को दिए गए अंतिम नोटिस में 10 दिन के भीतर जमीन खाली करने को कहा गया था।
लेकिन समय सीमा निकलने के बाद भी जमीन खाली नहीं हुई। इसके बाद सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा खुद जेसीबी और डंपर लेकर मौके पर पहुंच गई थीं।
जेसीबी के आगे लेट गए थे कर्मचारी
सोमवार को जैसे ही जेसीबी से पेट्रोल पंप के सामने का रास्ता खोदने की कोशिश हुई, वहां मौजूद कर्मचारी जेसीबी के आगे लेट गए। कर्मचारियों के विरोध के चलते कार्रवाई रुक गई और करीब दो घंटे तक मौके पर हंगामा चलता रहा।
इस दौरान नपा अध्यक्ष ने नगर पालिका के अमले और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। वहीं समीर गांधी का कहना था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है और सभी को कानून के हिसाब से ही काम करना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद नगर पालिका की ओर से जमीन खाली कराने को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर है। कोर्ट के विस्तृत आदेश से यह भी साफ होगा कि याचिका किस आधार पर खारिज की गई।


