शिवपुरी नगर पालिका में 7 महीने से परिषद सम्मेलन नहीं, करोड़ों के विकास कार्य अटके

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अध्यक्ष गायत्री शर्मा और सीएमओ यशवंत राठौर के बीच सम्मेलन कराने को लेकर अलग-अलग दावे; नामांतरण से लेकर जेसीबी, डंपर और पोकलेन खरीदने के प्रस्ताव लंबित


शिवपुरी। नगर पालिका परिषद में पिछले करीब सात महीने से साधारण सम्मेलन नहीं होने के कारण शहर के कई विकास कार्यों की स्वीकृति अटकी हुई है। सम्मेलन नहीं होने का असर नामांतरण से जुड़े मामलों, मशीनों की खरीद, जल आपूर्ति व्यवस्था और मेलों के आयोजन से संबंधित प्रस्तावों पर पड़ रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा और सीएमओ यशवंत राठौर दोनों ही सम्मेलन के लिए पत्राचार करने की बात कह रहे हैं, लेकिन अब तक बैठक नहीं हो सकी है। ऐसे में परिषद के लंबित प्रस्तावों को मंजूरी मिलने का इंतजार बना हुआ है।


सम्मेलन नहीं होने से कई प्रस्ताव लंबित -


नगर पालिका के आगामी सम्मेलन के एजेंडे में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल किए जाने हैं। इनमें मड़ीखेड़ा और सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट के लिए तीन-तीन मोटरों की दरों की स्वीकृति, बस स्टैंड संचालन के लिए ठेका, वार्ड क्रमांक 29, 30 और 35 में पानी की टंकियों के निर्माण पर हुए व्यय से संबंधित विषय शामिल हैं।


इसके अलावा शहर की सफाई व्यवस्था के लिए दो नई जेसीबी मशीनें, दो डंपर और एक पोकलेन खरीदने की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव भी लंबित बताया जा रहा है। बाजार बैठक वसूली और वर्ष 2026-27 में सिद्धेश्वर-बाणगंगा मेला, गांधी पार्क मेला सहित अन्य मेलों के आयोजन से जुड़े विषयों पर भी परिषद में विचार किया जाना है।


इन प्रस्तावों पर निर्णय नहीं होने से नगर पालिका के कामकाज और विकास योजनाओं की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आई है।


अध्यक्ष बोलीं- तीन बार पत्र लिख चुकी हूं -


नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा का कहना है कि उन्होंने साधारण सम्मेलन आयोजित कराने के लिए सीएमओ को तीन बार पत्र लिखे हैं। उनके मुताबिक, एजेंडे के कुछ बिंदु भी तय किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी सम्मेलन आयोजित नहीं हुआ है।


अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका में कुछ कार्यों की स्वीकृति बाद में ली जाती है। उनका कहना है कि शहर के विकास से जुड़े प्रस्तावों पर समय पर निर्णय होना जरूरी है।


सीएमओ बोले- एजेंडा तैयार, जल्द होगा सम्मेलन -


वहीं, सीएमओ यशवंत राठौर का कहना है कि परिषद सम्मेलन के लिए एजेंडा तैयार किया जा चुका है और इस संबंध में अध्यक्ष को पत्राचार भी किया गया है। उन्होंने जल्द सम्मेलन आयोजित कराने की बात कही है।


अध्यक्ष और सीएमओ के बयानों से स्पष्ट है कि दोनों पक्ष सम्मेलन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं, लेकिन बैठक की तारीख अभी सामने नहीं आई है।


पार्षदों के विवाद का भी पड़ रहा असर -


नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष और कुछ पार्षदों के बीच पिछले करीब दो वर्षों से विभिन्न मुद्दों पर मतभेद होने की बात कही जा रही है। पूर्व की बैठकों में विरोधी पार्षदों के विरोध और बहिष्कार की घटनाएं भी सामने आई थीं। ऐसे में परिषद की बैठक आयोजित करना और प्रस्तावों पर सहमति बनाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।


परिषद के मौजूदा कार्यकाल में करीब 10 महीने शेष रहने की जानकारी के बीच लंबित विकास कार्यों पर निर्णय लेने की जरूरत और बढ़ गई है। शहरवासियों की नजर अब इस बात पर है कि नगर पालिका परिषद का सम्मेलन कब आयोजित होगा और लंबित प्रस्तावों को कब तक मंजूरी मिल सकेगी।


अब आगे क्या - 


सम्मेलन की तारीख तय होने और एजेंडे पर निर्णय लिए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा कि लंबित प्रस्तावों में से किन कार्यों को मंजूरी मिलती है और उनका क्रियान्वयन कब शुरू हो पाता है।

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